Sunday, May 26, 2024
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What is the reasons of depression | डिप्रेशन के क्या कारण होते हैं :-

डिप्रेशन  ( Depression ) के कारण 

 नकारात्मकता और  रिस्तों में अनबन, असफलता, धोखा , नुकसान, आर्थिक संकट, कमजोर वयक्तित्व, तनाव, बीमारी, नशा, आदि के कारण लोग होते हैं डिप्रेशन का शिकार

* नकारात्मकता 

नकारात्मकता. अवसाद एक तरह से व्यक्ति के दिमाग को प्रभावित करता है | इस कारण व्यक्ति हर समय नकारात्मक सोचता रहता है |

जब यह स्थिति चरम पर पहुंच जाती है तो व्यक्ति को अपना जीवन उद्देश्य हींन लगने लगता है। इसके अलावा हमेशा हीन भावना से रहने लगते हैं |
धीरे-धीरे यही नकारात्मकता उनमें गंभीर अवसाद डिप्रेशन का कारण बन जाती है | जब किसी व्यक्ति की सामान्य जीवनशैली में बदलाव होने लगे, परेशानियां खड़ी होने लगे |
ऐसी स्थिति में विभिन्न व्यक्ति, पुरुष / महिलाओं को डिप्रेशन होने लगता  है तो उनके स्वभाव में उदासी, नकारात्मकता, दोष भाव और रोना ज्यादा देखा जाता है |
यह स्थिति तब पैदा होती है जब हम जीवन के हर पहलू पर नकारात्मक रूप से सोचने लगते हैं और जब यह स्थिति चरम पर पहुंच जाती है तो व्यक्ति को अपना जीवन बेकार लगने लगता है |
जब दिमाग को पूरा आराम नहीं मिलता और उस पर हमेशा एक दबाव बना रहता है तो ऐसी स्थिति में तनाव आपको अपनी चपेट में लेकर डिप्रेशन का रूप लेलेता है |

* जिद्द 

बाहर से खुश हैं मगर अंदर से डिप्रेशन में हैं क्यों कि आज के मॉडल और आधुनिक युग में ऊंची ख्वाइस, अधिक अपेक्षा ने कई लोगों को और बच्चों को जिद्दी बनादिया है |
कई तरह की जिद्द को लेकर वह कभी-कभी डिप्रेशन का शिकार हो जाते हैं  |  प्रायः कई प्रकार की जिद्द पकड़ लेते हैं, जो कहीं न कहीं उनके डिप्रेशन का कारण बन बैठता  है
टूटे हुए रिश्ते को दोबारा जोड़ने की जिद्द, किसी सौक को पूरा करने की जिद्द, अनैतिक जिद्द, आदि अन्य तरह की जिद्द के कारण लोग आज डिप्रेशन का सीकर हो रहे हैं |

* धोखा 

आज के मॉडल और आधुनिक जमाने में चर्चा जोरों पर है कि किन कारणों से युवा वर्ग आत्महत्या करने को मजबूर हो रहा है |
ऐसे में जो बातें सामने आईं उनमें प्यार में धोखा, कॅरियर में बैरियर या अपनों से दूरी ज्यादा पाई गईं, जो युवाओं को डिप्रेशन की गिरफ्त में अधिक तर पाया गया  है |
पूरी दुनिया में हज़ारों-लाखों लोग मानसिक रोग के शिकार होते हैं और इसका असर उनके साथ साथ उनके पूरे परिवार पर भी पड़ता है | और प्रेमी या प्रेमिका उनके साथ धोखा कर देते हैं |
तो वो खुद को अकेला महसूस करने लगते हैं, और डिप्रेशन का शिकार हो जाते हैं |

* अधिक संवेदनशील

जो लोग मानसिक रोग या जीवन की विभिन्न गतिविधि  के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं वह डिप्रेशन वाले लोगों की अपेक्षा जिनको डिप्रेशन नहीं होता है उनकी  तुलना में  डिप्रेस्ड लोगों को हार्ट अटैक  चार गुना होता है | हम सब अपनी ज़िंदग़ी में कभी न कभी थोड़े समय के लिए नाख़ुश होते हैं मगर डिप्रेशन यानी अवसाद वाले लोग उससे कहीं ज़्यादा गहरा, लंबा और  चुनौतीपूर्ण समय से गुज़र रहे होते हैं |
तो उनके डिप्रेशन अवसाद में जाने की आशंका अधिक रहती है | समस्याओं का समा धान न मिलने पर जो मानसिक विकृतियां  जन्य लेती हैं , उनहीं का एक रूप डिप्रेशन  यानी अवसाद  है |
किसी ने ताना दिया या गुस्सा किया तो अक्सर लोग, जो अधिक संवेदनशील होते हैं, वह डिप्रेशन की अवस्था में चले जाते हैं | गम्भीर मामलों में डिप्रेशन के कारण असहाय व निराशा की स्थिति उत्पन्न होती है |
जीवन एक ऐसा पथ है, जिसमें कई उतार-चढ़ाव आते हैं. कुछ को हम आसानी से पार कर लेते हैं, तो कुछ हमें  थका देते हैं. कुछ ऐसे उतार-चढ़ाव भी होते हैं, जिनमें हम खुद को फंसा हुआ या लगातार धंसता हुआ महसूस करते हैं. |
कई बार ऐसे ही पड़ाव आपको डिप्रेशन के दलदल में ढकेलदेते देते हैं | डिप्रेशन की सबसे बड़ी वजह यह भी है कि आप अपने जीवन में बहुत अधिक अपेक्षाएं पाल लेते हैं या कोई आप से बहुत अधिक अपेक्षाओं की उम्मीद लगा बैठते हैं |
जब ये अपेक्षाएं पूरी नहीं हो पाती, तो मानसिक, अशांति और अंतर्कलह पैदा होने लगती है | कई बार कई परिवार वाले अपने बच्‍चों से – भी बहुत अधिक उम्मीद / अपेक्षा करते हैं और उन पर दबाव बनाते हैं, |
तो कई बार बच्चे अपने परिजनों से उनकी अपेक्षाएं पूरी करने का दबाव बनाते हैं. तो बेहतर है कि आप न ही दूसरों से अपेक्षा करें और न ही उनकी अपेक्षाओं को खुद पर हावी होने दें. तो सायद इस तरह के तनाव डिप्रेशन से बचा जा सकता है |

* मानसिक तनाव

मानसिकतनाव डिप्रेशन ( Depression ) की एक 
बड़ी वजह बन रहा है |जब एक व्यक्ति ठीक से सोच नहीं पाता, उसका अपनी
भावनाओं और व्यवहार पर काबू नहीं रहता, तो ऐसी
हालत को मानसिक रोग कहते हैं |

मानसिक रोगी आसानी से दूसरों को समझ नहीं पाता और उसे रोज़मर्रा के काम ठीक से करने में मुश्किल होती है | मानसिक रोग किसी को भी हो सकता है, |फिर चाहे वह आदमी हो या औरत, जवान हो या बुज़ुर्ग, पढ़ा-लिखा हो या अनपढ़, या चाहे वह किसी भी संस्कृति, जाति, धर्म, या तबके का हो |
वह एक अच्छी और खुशहाल ज़िंदगी जी सकता है | लेकिन ज्यादातर केस में लोग सलाह लेने से डरते हैं कि लोग उन्हें पागल समझेंगे और समस्या बढ़ जाती है |
मानिसक रोग कई प्रकार के होते हैं, तनाव, डिप्रेशन, चिड़चिड़ापन, गुस्सा आदि  सभी मानसिक रोग के अंतर्गत आते हैं यह मानसिक तनाव के कारण उत्पन्न होते हैं |
तनाव और डिप्रेशन के पहचानने की बात करें, तो तनाव होने पर हो सकता है, कि आपको काफी देर रात तक नींद न आए या फिर साधारण समय की अपेक्षा काफी अधिक सोते रहें |
लेकिन डिप्रेशन होने पर आपकी नींद में इस तरह के बदलाव होंगे कि आपको अनिद्रा नींद न आने जैसी तकलीफ हो सकती है |
मानिसक रोग कई प्रकार के होते हैं, तनाव, डिप्रेशन, चिड़चिड़ापन, गुस्सा ये सभी इसी के अंतर्गत आते हैं | मानसिक तनाव और डिप्रेशन, स्वस्थ और सेहतमंद जीवनशैली को बेहद प्रभावित करता है |
इसका प्रभाव न केवल आपके मन व मस्तिष्क पर नकारात्मक रूप से पड़ता है, वल्कि यह आपको शारीरिक रूप से भी कमजोर कर देता है |
मानसिक तनाव एक भयानक बीमारी है जो अनेक भयंकर असाध्य बिमारियों का कारण बन सकती है | कई बार तनाव और डिप्रेशन में आदमी ग़लत कदम उठा लेता है |
हम रात में बिस्तर पर चले जाते हैं  लेकिन रात भर करवटें बदलते रहते हैं परंतु नींद नहीं आती है | तनाव डिप्रेशन की एक बड़ी वजह बन रहा है | जिससे निजात पाना, उबर पाना हर व्यक्ति के लिए संभव नहीं होता |
मानसिक बीमारियों को आज के आधुनिक दौर में दिमाग का फितूर और मन का वहम कह कर नजरअंदाज कर दिया जाता है, लेकिन कई बार प्रायः देखने में आता है- इसके परिणाम बहुत घातक भी साबित होते हैं |
कई तनाव आपके जीवन में कुछ अच्छा भी करने के लिए प्रेरित करता है और आपको एक अच्छा इंसान बनाने के लिए मदद करता है | वैसे तनाव डिप्रेशन की शुरुआत भी हो सकता है, |
परंतु इसका मतलव यह विलकुल भी नहीं है कि जिस व्यक्ति को तनाव है वह व्यक्ति डिप्रेस्ड होना जरूरी हो | तनाव और डिप्रेशन में यह अंतर है कि तनाव की स्थिति का समय खत्म होने पर,
उस स्थिति से निपटने पर आप की जिंदगी द्वारा से सामान्य हो जाती है आप फिर से खुस होने लगते हैं अन्य गतिविधि पर ध्यान देने लगते हैं | वहीं डिप्रेशन में आप अंदर से उदास रहते हैं |

* रिस्तों में अनबन 

आज के दौर में रिस्तों में अनबन के कारण तनाव और डिप्रेशन ( अवसाद ) के बड़ती संख्या चिंता का विषय बनता जा रहा है
आधुनिक युग और भागम भाग की जीवन शैली रिस्तों में अनबन ( रिस्तों में दरार ) पैदा करने का प्रचलन सा बन गया है |
जरा जरा सी बातों में रिस्तों में अनबन पैदा हो जातीं हैं एक दूसरे से खुस न रहपाना, संतुष्ट न होना  एक दूसरे पर दोसारोपड़ करना  छड़छिड़ापन पैदा करता है इसी कारण डिप्रेशन पैदा होता है |
फलस्वरूप रिस्ते टूट जाते हैं बिखर जाते हैं अब वह रिस्ता चाहे मिया बीबी का हो या भाई-बहिन का हो माता / पिता बीटा / बेटी का हो सास बहु आदि अन्य किसी का भी होसकता है |

* आत्म घृणित

जब कोई काम खराब हो जाता है या फिर कोई नुकसान हो जाता है और गलत फैसला लेने पड़ जाते हैं जाने अनजाने कभी कभी बिना सोचे बिचारे कोई काम करना भारी पड़ सकता है |
जिस कारण लोग दूषित नजरिए  ( घृणा की दृष्टि ) से देखते हैं तो इंसान खुदबखुद आतंघृणित होने लगता है और मन ही मन दुखी होता है यह वेदना असहनीय दर्द देती है |
जिसके कारण अक्सर लोग डिप्रेस्ड हो जाते हैं |

* गुस्सा

गुस्सा एक बीमारी तो नहीं लेकिन गुस्से की वजह से कुछ बीमारियां जरुर उत्पन्न होने लगती हैं | अक्सर जब लोगों को किसी धोके, अनचाही बातें अनचाही चीज अनचाहे लोग झगड़े नुकसान के वजह से अक्सर गुस्सा आता रहता है |
इसके साथ ही कभी-कभी अपनी नौकरी से संतुष्ट ने होने पर भी लोगों में गुस्सा आने की वजह बन जाता है। कभी कभी इस तरह का गुस्सा डिप्रेशन को भी आमंत्रित कर डालता है |
कुछ लोग गुस्सा पर अपना नियत्रण नहीं रख पाते हैं | जिसके परिणाम बहुत खराब भी हो सकते हैं |


* असफलता

अति महत्वाकांक्षा ( उम्मीद  से अधिक की चाहत ) इंसान  को  पागल करदेती है इंसान सिर्फ जीत ही देखना पसंद करता है | अतः असफलता व अन्य कारणों के चलते लगातार सुसाइड के मामले बड़ते ही रहते हैं |
ताजा हाल वॉलीवुड एक्टर सुशांत सिंह राजपूत केस से समझ सकते हैं | विश्व स्वास्थ्य संगठन  (WHO) के वाक्य अनुसार भारत देश में एक वर्ष में करीव 10 लाख लोग सोसाइड करते हैं |
इस वाक्य के अनुसार हर 40 सेकंड में एक व्यक्ति सुसाइड करता है | असफलता के कारण लोग इतना भय भीत हो जाते हैं कि कुछ भी नहीं सूझता है बस असफलता का ही भूत सवार कर लेते हैं |
असफलता कोई स्थाई नहीं और सफलता कोई आखरी नहीं ये जीवन संघर्ष का पथ है क्या पता कहीं सफलता अगली बार आपका ही इंतजार कर रही हो |
कुदरत हर किसी को आजमाती है परीक्षण करती है कुदरत आपको बहुत कुछ देना चाहती है सफलता, खुसियाँ, लोग मंजिल बस परख करना है कि आप उस काबिल भी हो कि नहीं |
होंसला रखें आपकी चाहत अवस्य पूरी होगी बस निरास न हों |
इंसान केवल समस्या में ही उलझ कर रह जाता है अगर समस्या से हटकर समाधान की ओर बड़े समाधान के लिए व्यस्त होकर मगन हो जाये तो आखिर समाधान को मिलना ही पड़ता है |
जो हार जाता है कुदरत भी उससे मुंह मोड लेती है और जो हर समय खुस होकर समाधान में व्यस्त रहते हैं संघर्ष करते हैं कुदरत भी उन्ही का साथ देती है |
आप सकारात्मक बने रहें और अपने पथ पर डटे रहें मंजिल अवस्य मिलेगी आपको कोई न कोई समाधान अवस्य मिलेगा आप गलत भटकाव से दूर रहें |


* नुकसान

इंसान अपने जीवन में नुकसान के कारण दुखी होता है परेसान होता है और कुछ दिखाई नहीं देता है तो डिप्रेस्ड हो जाता है | डिप्रेस्ड व्यक्ति में डिमेंशिया होने की  संभावना अधिक हो जाती है |
कुछ विशेषज्ञों की राय है कि यह इस लिए है क्योंकि डिप्रेशन में मस्तिष्क में कई बदलाव होते हैं, |और संवहनी
 ( रक्त-कोशिकाओं ) की समस्याएँ (नाड़ी संबंधी समस्याएँ) भी हो सकती हैं, |
ब्लड प्रेसर का अधिक बड़ना अधिक कम होना इस तरह की गत विधि होती रहती है और इन बदलाव के कारण डिमेंशिया ( उन्माद / विक्षिप्त / पागलपन ) की संभावना अधिक होती है |
बस बार बार एक ही सोच चलती रहती है की जो नुकसान हुआ है में इसकी भरपाई कैसे करूंगा इस नुकसान के वजह से पता नहीं मेरा क्या क्या खो सकता है क्या क्या और नुकसान हो सकता है |
और अपना संतुलन खोकर अपने आप में ही खो जाने का काम करते हुए डिप्रेशन से  इस तरह पीड़ित रहने लग जाता है | कई लोग अपने आपको संभालने के प्रयास करके अपना सब कुछ बचा लेते हैं |
वहीं कुछ लोग इस उलझन की भूल भुलैया में  गुम होकर इतना पागलपान धारण कर लेते हैं कि उन्हें नुकसान के सिवा और कुछ दिखाई ही नहीं देता है | और वो अपना सब कुछ खो बैठते हैं |

* अशान्ति 

अशान्ति के कारण भी लोग होते हैं डिप्रेशन  ( Depression ) के शिकार 

* आर्थिक संकटकिसी भी व्यक्ति पर जब आर्थिक संकट का पहाड़ टूटता
है | तो इस आपदा का सामना हर व्यक्ति नहीं कर पाता
है | अर्थ व्यवस्था के बिना जीवन चल ही नहीं सकता
और लोग अक्सर आर्थिक संकट का सामना करने में
असफल हो जाने पर ||

जब कोई भी व्यक्ति किसी भी तरह के संकट या जीवन के हो रहे उथल पुथल व परेशानियों से पीड़ा के कारण जो अशान्ति होती है तो अक्सर लोग डिप्रेस्ड हो जाते हैं |इसलिए हर व्यक्ति को जब भी इस तरह के उथल पुथल का सामना करना पड़े तो अपने किसी पहचानने वाले लोगों से संवाद करना चाहिए सलाह मुसविरा करना चाहिए |
किसी भी तरह की अशान्ति स्थाई नहीं होती ऐसा समय बेचैनी से भरा होता है बस आपको वो समय किसी भी तरह इगनौर करके निकाल देना चाहिए |
उदाहरण के लिए आप कोई भी गलत काम करने जा रहे हों या किसी को चोट पहुंचाने के लिए हाथ उठा रहे हों ठीक उसी समय आपका कोई महत्वपूर्ण फोन कॉल आ जाये तो आप क्या करेगें |
उस समय आप अपना हाथ रोक कर फोन कॉल पर बात करने लगजायेगें ना |
एक और उदाहरण – जब आप को एक हाथ की उंगली को दर्द होता है आप तड़प रहे होते हैं ठीक उसी समय आप का बच्चा किसी गाड़ी के नीचे आजाये तो आप क्या करेंगे उस उंगली के दर्द को भूल कर अपने बच्चे को बचाने में लगजाएंगे |
तो इसका मतलब ये है कि सब कुछ मानसिक स्थिति पर आधारित है | इसलिए अपने मानसिक संतुलन को किसी भी तरफ परिवर्तित किया जा सकता है तो जब भी किसी भी व्यक्ति को किसी भी तरह का संकट हो अपने आप को
नियंत्रित करना चाहिए  किसी खुसी नुमा पल को याद करते हुए आनंद की अनुभूति करना चाहिए | और ऐसे संकट के समय को हस्ते खेलते निकालने में ही फायदा है

* आर्थिक संकट

किसी भी व्यक्ति पर जब आर्थिक संकट का पहाड़ टूटता है तो इस आपदा का सामना हर व्यक्ति नहीं कर पाता है अर्थ व्यवस्था के बिना जीवन चल ही नहीं सकता और लोग अक्सर आर्थिक संकट का सामना करने में असफल हो जाने पर
डिप्रेशन का शिकार होने लगते हैं | कर्ज की मार झेलने में असमर्थता, घर या कारोबार चलाने में असमर्थता, जरूरत की पूर्ति न करपाना, इन कारणों से लोग अक्सर टूट जाते हैं फलस्वरूप दुखों से घिरजाना और परेसानियों का सामना करना,
मानसिक संतुलन बिगड़ना, इस तरह लोग डिप्रेशन का शिकार होने लगते हैं |
हर समस्या का समाधान होता है बस उस तक पहुँच ने के लिए प्रयास करना पड़ता है कुछ लोग इसका सामना करते हैं इसका समाधान करते है वहीं कुछ लोग डिप्रेशन का सिकार हो जाते हैं |

मानसिक रोग 

अवसाद ( डिप्रेशन | Depression )- मानसिक रोग का सबसे साधारण प्रकार अवसाद या डिप्रेशन है। आमतौर पर, इसकी शुरूआत तनाव से होती है, जो कुछ समय के बाद डिप्रेशन का रूप ले लेती है।
अगर आपकी कोई भी अनचाही हरकत बार बार आप की आत्मा को चोट पहुँचाती है मन विचलित होता है आप अपना नियंत्रण खो देते हैं आप का मन नकारात्मकता की ओर अधिक आकर्षित होता है तो आप डिप्रेशन का शिकार हैं |
आप एक गुलाब का फूल देख रहे हैं लेकिन उसका सही आनंद नहीं ले रहे हैं आपका मन बेचैन है कहीं और भटक रहा है तो आप डिप्रेशन के शिकार हैं |
अगर आपको याद नहीं कि आप आखिरी बार खुश कब हुए थे | बिस्तर से उठना या नहाने जैसी डेली रुटीन की चीजें भी आपको टास्क लगता हैं,
आप लोगों से कटने लगते हैं, आप खुद से नफरत करते हैं, और अपने आप को खत्म कर लेना चाहते हैं  तो आप डिप्रेशन का शिकार हैं | इन बातों के अलावा आपको तुरंत मदद लेनी चाहिए |
अपने किसी भी पहचान के व्यक्ति से संवाद करते रहना चाहिए अपनी समस्या को छुपाने के वजाय आपस में सलाह लेना चाहिए या किसी विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए |

* माहोल 

अकेलापन और मानसिक तनाव के कारण लोग हो रहे है 
डिप्रेशन  ( Depression ) का शिकार 
घर का झगड़ालू वातावरण बच्चों के मन में भय और शंका का कारण बन जाता है जिससे बच्चे अवसाद यानि डिप्रेशन के शिकार हो जाते हैं |
मियाँ-बीवी की तकरार हो तो हर घर का माहोल कलहकारी हो जाता है तो बच्चे अपना बचपन भूल जाते हैं, उनका भोलापन खो जाता है, और भटकते रास्ते पर पहुँच जाते हैं,  किसी भी तरह के गलत निर्णय का फैसला कर बैठते हैं |
आजकल बदलते माहोल के बीच संगत का भी बहुत बड़ा योगदान है, संगत गलत होने से गफलत में फसकर नहीं निकलपाने के कारण डिप्रेशन का शिकार हो जाते हैं |
तेज़ी से बदलते माहौल में हमारे शरीर और मन पर जो असर पड़ता है, उसे तनाव कहते है | खास बात ये है कि बच्चों में बहुत छोटे-छोटे कारण होते हैं डिप्रेशन के |
 वो आगे  चल कर हींन भावना से ग्रसित होकर मानसिक कमजोर हो जाते हैं, मानसिक कमजोरी ही अवसाद या डिप्रेशन का पहला कारण होता है।

* नफरत 

जिन लोगों को हर काम में हर जगह में हर व्यक्ति से सिर्फ नफरत होती है इन्हें कुछ अच्छा नहीं लगता बस नफरत हावी होती है |
तो नफरत की तरह ही चीजें जन्म लेती हैं उन्ही चीजों से इंसान डिप्रेशन का शिकार हो जाता है |

* बदलाव में अविश्वास 

जिन लोगों में किसी तरह के बदलाव की रुचि नहीं होती है ऐसे लोग बदलाव में  अविश्वास रखते हैं | इन्हें खुद पर यकीन ही नहीं होता कि बहुत कुछ संभावनायें हैं,
खुद पर यकीन तो करके देखो,नहीं करते इन्हें सिर्फ नकारात्मकता ही नजर आती है, ये  नकारात्मकता में ही पूरी ताकत लगाते हैं | परिणामतः डिप्रेशन के शिकार हो जाते हैं |

* रचनात्मक अरुचि 

जिन लोगों में किसी तरह के रचनात्मक गुण नहीं होते हैं अक्सर ऐसे लोग किसी काम या विशेषता में व्यस्त न होकर बस ध्यान को हर बार नकारात्मकता की ओर व्यस्त रख कर दुखी होते रहते हैं |
ऐसे लोगों को कोई कितना भी प्रेरित करने समझाने की कोसिस करे उन पर कोई फरक नहीं पड़ता है | डिप्रेशन की तरफ ज्यादा ध्यान लगाते रहते हैं | इस कारण ऐसे लोग अक्सर डिप्रेशन के सिकार हो जाते हैं |

*  चिड़चिड़ापन 

 चिड़चिड़ापन, जल्द गुस्सा आना डिप्रेशन के संकेत हैं |
अक्सर युवा पीड़ी में डिप्रेशन का सबसे आम कारण व्यवहार में बदलाव,  सामाजिक तौर पर अलग-थलग होना, चिड़चिड़ापन रहना  या जल्द गुस्सा आना ऐसे संकेत हैं जो कि डिप्रेशन को दर्शाते हैं |
 उसकी सामाजिक गतिविधियों और जिंदगी के अन्य हिस्सों में भी हताशा स्पष्ट दिखने लगती है। अगर आप ऐसे किसी भी समय का सामना कर रहे हैं तो अपने आप को लेकर ज्यादा सतर्क रहें |
अधिकतर  युवा पीड़ी अपनी जिंदगी में कभी ना कभी डिप्रेशन का शिकार होते ही हैं। ऐसे में आप सिर्फ अकेले नहीं है जोकि जिंदगी में निराशा महसूस कर रहे हैं, और लगों के उदाहरण से भी सीखें |
जिसके कारण हताशा बढ़ती है और उससे उबरने के लिए तेजी से प्रभावी कदमों को उठाना चाहिए।

* थकान और सुस्ती

अवसाद के कारण होने वाली थकान की वजह से ध्‍यान लगाने में दिक्‍कत, चिड़चिड़ापन और उदासीनता भी होने लगती है।
इन्‍हें रातभर सोने के बाद भी सुस्‍ती रहती है। अगर दुख और निराशा महसूस होने के साथ थकान भी ज्‍यादा लग रही है तो ये डिप्रेशन का शिकार हो जाते है |

*  प्रिय वस्तु / प्रिय व्यक्ति को खोने का डर 

अक्सर लोगों को अपने प्रिय जन को या फिर किसी प्रिय वस्तु को खोने का डर सताता रहता है | और लोग दुखित होकर डिप्रेशन के शिकार हो जाते हैं |
कोई किसी से प्यार करता है और जब प्यार टूट जाता है, तो अक्सर लोग डिप्रेस्ड हो जाते हैं | खुद का प्यार किसी और को मिलजाने पर, या किसी और के द्वारा चुरा ले जाने पर  जो दुख मायूसी प्रकट होती है वह डिप्रेशन में बदल जाती है |
जिस किसी भी जगह वस्तु से गहरा लगाव हो जाता है और वह खुद पर न रह पाये कोई और चुरा कर, छीन कर या जीत कर  ले जाए | इन सब कारण से जो दुख प्रकट होता है वह डिप्रेशन का रूप ले लेता है |

* अनिद्रा 

नींद या सोने में परेशानी होती है। हमारी जीवनशैली के दबावों के कारण आज के युवाओं के बीच आमतौर पर अनिद्रा विकार पाया जा रहा है |
नींद की कमी हमें विभिन्न रोग जैसे अवसाद, चिंता, उच्च रक्तचाप आदि की ओर अग्रसर करती है | हमारे मानसिक स्वास्थ्य पर नींद के शक्तिशाली प्रभावों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है |
लेकिन सही उपचार हम लोगों को मन की शांति देने में मदद कर सकते हैं, जो कि रात की शांतिपूर्ण नींद के साथ संभव  है |
अनिद्रा और नींद की कमीं, सुबह में  कच्ची या अधूरी नींद, दिन के दौरान थकावट और शाम को उत्तेजना, बेचैनी और बौद्धिक या तंत्रिका तंत्र में अधिक उत्तेजना।
लंबे समय का मानसिक संघर्ष, नर्वसता  इन सारे कारणों से कोई भी व्यक्ति डिप्रेशन का शिकार होने लगता है |

कुछ लोग कुपोषण,  हार्मोन, मौसम, तनाव, बीमारी, नशा, आदि जीवन में प्रक्रिया उतार चड़ाव के कारण भी डिप्रेशन | Depression  | का शिकार होने लगते हैं 

कुपोषण प्राय: पर्याप्त सन्तुलित आहार के आभाव में होता है। 
बच्चों और स्त्रियों के अधिकांश रोगों की जड़ में कुपोषण ही होता है |

कुपोषण, 

शरीर के लिए आवश्यक सन्तुलित आहार लम्बे समय तक नहीं मिलना ही कुपोषण है | कुपोषण के कारण बच्चों और महिलाओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है,
जिससे वे आसानी से कई तरह की बीमारियों के शिकार हो जाते हैं। अत: कुपोषण की जानकारियाँ होना अत्यन्त जरूरी है |
कुपोषण प्राय: पर्याप्त सन्तुलित आहार के आभाव में होता है। बच्चों और स्त्रियों के अधिकांश रोगों की जड़ में कुपोषण ही होता है |
स्त्रियों में रक्तश्राव  या घेंघा रोग अथवा बच्चों में सूखा रोग या रतौंधी और यहाँ तक कि चक्कर आना, अंधत्व भी कुपोषण के ही दुष्परिणाम हैं |
इसके अलावा ऐसे कई  रोग हैं जिनका सिर्फ एक ही कारण  है अपर्याप्त या असन्तुलित भोजन  इन सारे कारणों से कोई भी व्यक्ति डिप्रेशन का शिकार होने लगता है |

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